मर मिटने का सवाल ही नहीं क्योकि मैं तो मोहब्बत हूँ और मोहब्बत का कोई जवाब नहीं...

मैं साहिल पर लिखी इबारत नहीं 
जो लहरों से मिट जाती है
मैं बारिश की बरसती बूंद नहीं 
जो जो बरस कर थम जाती है 
मैं ख्वाब नहीं 
जिसे देखा और भुला दिया जाये 
मैं शमा नहीं 
जिसे फुका और बुझा दिया जाये 
मैं हवा का झोंका नहीं 
जो आये और गुजर जाये 
मैं चाँद भी नहीं हूँ 
जो रात के बाद ढल जाता है 
मैं वो एहसास हूँ 
जो तुझ मैं लहू बन कर गर्दिश करे 
मैं वो रंग हूँ 
जो तेरे दिल पर चरे और कभी न उतरे 
ख्वाब इबारत हवा के तरह 
चाँद बूंद शमा की तरह 
मर मिटने का सवाल ही नहीं 
क्योकि मैं तो मोहब्बत हूँ 
और मोहब्बत का कोई जवाब नहीं ...


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